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वो चेहरा जो कोई भूल नहीं सकता


ये चेहरा पहचान के लिए किसी का मोहताज तो नहीं है, ये भी हो सकता है कि शायद पहले कुछ लोग इस चेहरे को असली नाम से नहीं जानते होंगे। लेकिन अब ये दावा के साथ कह सकता कि आज की तारीख में ये चेहरा हर किसी के दिल में बैठ सा गया है। पिछले कुछ दिनों सोशल मीडिया पर इन शख़्स का नाम किसी के लिए मसीह तो किसी के लिए भगवान तक हो बन चुका है। जी हां ये वही शख़्स हैं जिन्हें सोनू सूद कहा जाता है भले ही ये फिल्मी दुनिया के छोटे सितारे हों या रील हीरो हों लेकिन सच यही कि हकीकत की दुनिया के बड़े सितारे और रियल हीरो अब सोनू सूद को ही कहा जा रहा है। किसी के भी एक ट्वीट करने पर इतने जल्दी रिप्लाई करना और फिर दूसरे दिन उसको उसके गन्तव्य तक पहुंचा देना इतनी दरियादिली आपकी सच्ची इंसानियत होने का फर्ज अदा करती है।
        जब से कोरोना आया उसके कुछ दिनों बाद से ये प्रवासी मजदूरों के लिए फ़रिश्ता बन कर उभरे हैं और अभी तक इन्होंने मीडिया आकंड़े के मुताबिक 12 हजार से ज्यादा मजदूरों को अपने खर्च पर घर भेज दिया है। इनके इस काम की जितनी सराहना की जाए बहुत कम है। इन्होंने सिर्फ मजदूरों को घर ही भेजने का काम नहीं किया बल्कि हमारे सिस्टम की भी पोल खोली है। क्रोनोलॉजी को जरा राजनीति से हटकर समझिए कि जो एक व्यक्ति ना नेता है, न किसी पार्टी का सदस्य, ना पावर फुल व्यक्ति, ना कोई अधिकारी तो उसने अपने दम पर जब 12 हजार मजदूर भेज दिए तो क्या हमारीं सरकारे या मंत्री विधायक ये काम नहीं कर सकते थे। यदि कर सकते थे तो फिर मजदूरों को सड़क पर क्यों भटकना पड़ा ये संजीदा सवाल है।
              वैसे वो मजदूर तो सर आपका कर्ज नहीं उतार पाएंगे लेकिन हां उनकी दुआ जरूर आपके हरदम साथ रहेगी। संकट-ए-दौर में जो आपने किया है वो वाकई काबिले तारीफ़ है। आपसे कई लोगों को और बड़े बड़े सितारों को सीख भी लेनी चाहिए कि जिन लोगों से आप बने हो यदि उनके नहीं हुए या संकट में उनकी मदद नहीं करी तो फिर आप काहे के सितारे।
आपको मेरा दिल से सलाम...

                      - चन्द्रभान_सिंह_लोधी

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