आखिर ये कैसा प्रदर्शन है??
हाल ही में मोदी सरकार ने देश मे NRC लागू की है जिसका विरोध देश के सभी राज्यों में होने लगा है विरोध की चिंगारी आग की तरह फैलती जा रही है, लेकिन मेरा सवाल ये भी है आखिर ये कैसा विरोध है? छात्र देश का भविष्य कहलाते हैं लेकिन आप लोग यदि अपने ही देश की संपत्ति ही को मिटाएंगे तो फिर के तो हिंसा हुई। मैं उन लोगों से कहना चाहता हूं कि यह देश किसी की जागीर नहीं है जो जब चाहे कोई भी हमारे देश की संपत्ति को मिटा कर चला जाए चाहे वह दिल्ली पुलिस हो या फिर जामिया के छात्र हो या कोई भी आंदोलनकारी हो। आपका प्रदर्शन करना जायज है विरोध सरकार का करना अधिकार है लेकिन हमारे देश को नुकसान पहुंचाने आपका अधिकार नहीं है। इस देश को बनाने में न जाने कितने लोगों ने खून की होलियां खेली थी न जाने कितनी माँओ ने अपनी गोद सूनी की थी कई बहनों की राखियां में दीमक लग गई थी। तो इस देश की फुलवारी को हमारे पुरखो ने खून से सींचा है इसे हम हरगिज नहीं मिटा सकते। विरोध करो और उस हद तक करो जब तक आपकी मांग सरकार मान न ले लेकिन गांधी विचारधारा से करो। विरोध करना हमारे बाबा साहेब ने संविधान में आजादी दी है लेकिन यार ये कैसा विरोध की एक तरफ आप गांधी और अम्बेडकर की फोटो लिए हो और दूसरी तरफ आप हिंसा कर रहे हो। चाहे पुलिस की बात हो या जामिया के छात्र हो जिसने भी ये बसें जलाई हैं वह निंदनीय कृत्य है इसलिए आप सभी से मेरा यही आग्रह है कि विरोध गांधीवादी तरीके से करो और आंदोलन में तो वह सकती है मेरे भाईयो कि जिस अंग्रेजी हुकूमत का आधी दुनिया मे डंका बजता था वह इस देश से उखाड़ दी गई तो फिर आज की सरकारें तो कुछ भी नहीं है इसलिए ध्यान रहे विरोध हिंसात्मक मत होना चाहिए। कोई अधिकार नहीं हमारी सम्पदा को चोट पहुंचाने का क्योंकि इसमें हम सभी के पुरुखों का खून लगा हुआ है इसलिए यह कदापि बर्दास्त नहीं होगा।
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चन्द्रभान_सिंह_लोधी
जय हिंद
नोट- ये लेखक के निजी विचार हैं इसका etv bharat से कोई ताल्लुक नही हैं। इसलिए इस लेख का जिम्मेदार स्वयं लेखक होगा.
nyc lekh
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