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Showing posts from April, 2020

वो छत पर सोना याद आता है

संस्मरण गर्मी के दिन भी क्या दिन होते है ये तो गांव वाले लोग ही जानते हैं, जंहा ना मच्छर औऱ ना ही बदबू की समस्या। आज से एक साल पहले तक के वो दिन नहीं भुलाए जा रहे हैं जो हम छतों पर अपनी रात बिताया करते थे। गड़ोला गांव में थे कोई रोजगार था नहीं, गर्मी के दिन भी थे तो बाहर जाते थे तो धूप लगती थी। अब क्या करते गांव में कोई प्रेमिका भी नहीं थी जो उससे बात करके मन बहला लेते। लेकिन हां मेरे प्यारे दोस्त जरूर थे जिनसे कभी लड़कर तो कभी बातें करके मन जरूर बहल जाता था। मेरे एक दोस्त की प्रेमिका थी तो कभी-कभी उससे बात कर लेता था लेकिन वह दोस्त कहीं मुझे गलत ना समझे इस बजह से उससे भी ज्यादा बात नहीं करता था।        मेरी उस दोस्त से हर दिन किसी न किसी बात को लेकर लड़ाई होती थी और ये लड़ाई कभी-कभी खूना खच्ची तक पहुंच जाती थी। लेकिन थी मजाल दोनों की कि एक घण्टे से ज्यादा बैर बंधा हो भले ही किसी भी बात को लेकर लड़ाई हुई हो। बैसे जिस गांव में मेरा ये दोस्त था तो उस गांव में कुछ सालों से 10 से 15 दिन तक ही रुकने को मिलता था और जिसके घर रुकता था वह भी कहने लगतीं थी कि बेटा तुम अब जा...

उसके जाने के बाद नींद भी चली गई !

  कहानी   रेणुका उसके के लिए प्यार थी या बस एक दोस्त या फिर एक टाइमपास थी ? ये तो चंदू ही जानता है। रेणुका का रोज फोन आना उससे बात होना चंदू के दिल को बहुत अच्छा लगता था। दिन भर वो कॉलेज में रहती थी चंदू भी कॉलेज में रहता था तो इस कारण से दोनों की बात नहीं हो पाती थी। जैसे ही चंदू अपने कॉलेज से निकलता था तो वह अपना फोन देखता था कि किसी का फोन तो नहीं आया। रेणुका का कॉलेज से निकलने का समय फिक्स रहता था लेकिन चंदू का नहीं इस बजह से ये जरूरी नहीं होता था कि रेणुका अपने फिक्स समय पर फोन लगाए औऱ चंदू उठा ही ले। रेणुका अपने रूम जाकर अपना काम करके वो चंदू को फोन करती थी लेकिन यदि चंदू कॉलेज में रहता था तो नहीं उठा पाता था इस बजह से उसकी बात कभी कभार उसके द्वारा फोन लगाने पर नहीं हो पाती थी।           जैसे चंदू अपने फोन को देखता था तो कई मिस्डकॉल डली रहती रहतीं थी तो वह सोचता था कि पहले किसको लगाएं ? तो मन यही जवाब देता था कि रेणुका तो अपनी है उसको कभी भी लगा लेंगे पहले अन्य लोगों से बात कर लो तो इस प्रकार से रेणुका के पहले जिनकी मिस्डकॉल रहती थीं उनको फो...