चारों तरफ शोर शराबा है,
राम नाम का नारा गूंज रहा है।
मेरे गांव की बिजली गोल है,
अब कोई नहीं बोल रहा है।
चारों तरफ यात्राएं हो रही हैं,
नेता जी के नारे लगाए जा रहे हैं।
मेरे गांव में पानी का अकाल पड़ गया,
अब न कोई आवाज उठा रहा है।
चारों तरफ कन्याएं भोज हो रहीं,
लोग धर्म समझकर लाभ उठा रहे हैं।
मेरे गांव में किसानों की फसलें जल गईं,
अब न कोई मुआवजा दिलवा रहा है।
गायों पर खूब राजनीति हो रही है,
हिन्दू-मुसलमान में लड़वा रहे हैं।
भूख-प्यास से मवेशी रोज मर रहे हैं,
अब ना कोई दल आगे आ रहा है।
आज फलाने नेता जी से मुलाकात हुई,
ऐसीं फेसबुक पर पोस्ट हो रहीं हैं,
मेरे क्षेत्र में गरीबों की हजार समस्याएं हैं,
अब इनकी मांग ना कोई कर रहा है।
"चन्द्रभान" दर्द बहुत है लोगों का,
मगर अब ना कोई लिख रहा है।
मेरे गांव के समस्याओं से प्यासे मर रहे,
अब ना कोई राहत का पानी पिला रहा है।
- चन्द्रभान सिंह लोधी
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