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Showing posts from August, 2019

कविता

कविता तुम्हारे बिना जीना सीख लूंगा मै तुम्हारे बिना रह नहीं सकता, तुम्हारे बगैर जी नहीं सकता। यह सब तुम जानती हो, शायद इसलिए तुम मुझे हर बक्त नजरअंदाज करती हो। मेरे दिल से खिलवाड़ करती हो। मगर हाँ....... अब तुम्हारे बगैर मै जीना सीख लूंगा। हाँ तुम्हे पता है... तुझे देखे बिना मेरा दिन नहीं कटता ये उजाला मुझे अँधियारा सा है लगता जब तक तू मेरे सपनो में न आए रातों की नींद मेरी पूरी नहीं होती फिर भी तुम मुझे नजरअंदाज करती हो मगर हाँ........ अब तुम्हारे बगैर मै रहना सीख लूंगा। शायद तुम्हे ये भी पता है... ये जमाना हमारे प्यार का कायल हुआ करता था हम दोनों से अपने ही लोग चिड़ा करते थे फिर ऐसा क्या हुआ जो अचानक से तुमने मेरे ख्याबो में आना बंद ही कर दिया मेरी जिंदगी का एक पल में सुख चैन छीन लिया मेरे चेहरे की मासूम सी मुस्कुराहट को छीन लिया मेरे जिन्दा रहने की उस वजह को छीन लिया मगर हाँ...... अब तुम्हारे बगैर मै मुस्कुराना सीख लूँगा।                      ...