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टिक टोक ही बैन क्यों?


कुछ दिनों से मैं देख रहा हूं कि सोशल मीडिया पर भारत में टिक टोक बैन करने की मांग चल रही है। ट्विटर पर भी इसे बैन करने के लिए बहुत तेजी से ट्रेंड किया जा रहा है। सबसे पहले मैं बताना चाहता हूं की टिक टॉक चीन का एक मोबाइल एप्लीकेशन है, जिसमें कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल में इंस्टॉल करके अपनी कला दिखा सकता है। इस तरह के बहुत से ऐप है जैसे कि लाइक, हेलो, शेयर चैट, स्टार मेकर और भी कई हैं जिनकी मांग अभी बैन होने के लिए नहीं उठी लेकिन टिक टोक की बस उठ रही है। अब तो बड़े-बड़े फिल्मी स्टार, पॉलीटिशियन, समाजसेवी भी टिक टोक बैन की मांग करने लगे जो टिक टोक पर वीडियो भी नहीं बनाते हैं वह भी मांग कर रहे हैं।
         कुछ लोग तो टिक टॉक को अपने मोबाइल से अनइंस्टॉल करने में देश हित की बात कर रहे हैं। जैसे कि कुछ सालों से प्रथा ही चली आ रही है कि कोई भी चीज का यदि बहिष्कार कराना है तो उसे देश हित में जोड़ देते हैं। चाहे वह इंसान हो, राजनीतिक पार्टी हो या कोई भी वस्तु हो बस देश हित में जोड़ दो ताकि लोगों की भावना अपने देश के प्रति उमड़ आए और उनकी मांग पूरी हो जाए। लेकिन मुझे नहीं लगता कि टिकटोक अपने मोबाइल में अनइंस्टॉल करने से देश का हित या देश का अहित हो सकता। एक मोबाइल से  ऐप हटाने में देशभक्ति का प्रमाण पत्र नहीं दिया जा सकता है।
        अब बात करते हैं टिक टॉक के बारे में यह वही टिक टॉक है जिसने एक छोटे से गांव से लेकर कस्बा, शहर, अमीर-गरीब, अंधा, लंगड़ा जैसे कई लोगों को स्टार बनाया है। जो अपनी कला जानते थे लेकिन उन्हें प्लेटफार्म नहीं मिल रहा था तब उन्हें टिक टोक मिला। ऐसे कई लोग हैं इसी देश में जो आज देश के सुपर स्टार बन चुके हैं। ये वही टिकटोक है जिसने अमीरी गरीबी का भेद नहीं देखा, लूले लंगड़े का भेद नहीं देखा, काले गोरे का भेद नहीं किया और आपको स्टार बना दिया। यदि तर्क दिया जाए तो जितने लोग अमिताभ बच्चन, सलमान खान या अजय देवगन को देखते हैं, उतने एक 15 साल के लड़के को टिक टॉक पर फॉलो करते हैं और देखते हैं। क्या ये आम बात है? नहीं। यदि टिक टोक ने ऐसे लोगों को सुपरस्टार बनाया है तो उसमें गलत क्या है?
            जो लोग टिकटोक बैन करने की मांग कर रहे हैं वह तर्क देते हैं मैं उन तर्कों को भी लिख रहा हूं। पहला तर्क की टिक टॉक पर अश्लीलता फैल रही है। दूसरा तर्क टिकटोक पर धार्मिक भावनाओं से खेला जा रहा है। तीसरा तर्क यह चीन का ऐप है इसको अनइंस्टॉल करने से चीन बर्बाद हो जाएगा। चौथा तर्क इससे बच्चे बिगड़ेंगे नहीं। तो ये सब लोगों के तर्क हैं। तो मैं बताना चाहता हूं कि दुनिया की ऐसी कोई चीज नहीं है जिसमें कुछ ना कुछ अपवाद ना हो। यदि अश्लीलता की बात की जाए तो आज के समय में कितनी वेब सीरीज आ रही हैं, जिसमें खुलेआम सेक्स वाली बातें, सेक्स दिखाया जा रहा है। बॉलीवुड से कई फिल्में आई जिसमें सांप्रदायिकता, अश्लीलता दिखाई गईं हैं, ऐसे कई गाने आए जिनका कोई सेंस नहीं है जैसे "चोली के नीचे क्या है", "कुंडी मत खड़काओ राजा" ऐसे कई गाने आए तो क्या हम फिल्में देखना, गाना सुनना या वेब सीरीज देखना बंद कर सकते हैं? क्या इन्हें भी भारत में बैन कराने की मांग कर सकते हैं? नहीं कर सकते। तो फिर एक ऐप को हटाने से क्या फायदा।
           मैं यह नहीं कहता हूं कि आप मत हटाइए, आप स्वतंत्र हैं आपको जो करना है करिए। लेकिन सिर्फ में लिख रहा हूं उनके बारे में जिनको कभी  35 करोड़ की फीस लेने वाले अभिनेता, स्टार नहीं बनाते। लेकिन 70mb के एक मोबाइल ऐप ने आपको स्टार जरूर बनाया है। रही बात अश्लीलता या सांप्रदायिकता की तो वह इंसान की सोच से होता है। गंदी नाली में कमल खिलता है फिर भी वह भगवान के ऊपर चढ़ाया जाता है।
          मुझे तो लगता है कि जो बड़े-बड़े स्टार टिक टोक बैन करने की मांग कर रहे हैं, उनको अब डर लगने लगा है कि एक गरीब का बच्चा, एक गांव से निकला आदमी जिसकी कोई शक्ल नहीं है अब वो स्टार बन रहा है, वो पैसा कमा रहा है। इस तरह से तो उनकी दुकान बंद हो जाएगी और भारत में सबसे पावरफुल एप्लीकेशन इस समय टिकटोक है तो इसलिए भी लोग बैन कराने की मांग कर रहे हैं। यदि इसमें देश हित की बात है तो मेरा उन लोगों से सवाल है कि आप देश हित में विदेश की चीजें क्या-क्या त्याग सकते हो? आप मोबाइल किस देश या किस कंपनी का चलाते है? व्हाट्सएप, फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम कहां का चलाते हो? इन्हें भी छोड़िए इनसे भी तो विदेश के लोग करोड़ों कमा रहे हैं। बाकी आपकी मर्जी आप इसे अनइंस्टॉल कर सकते हैं या जिस तरह से वीडियो बना रहे हैं बना भी सकते हैं।
 जय हिंद
                          - चन्द्रभान सिंह लोधी

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