कहानी
रेणुका उसके के लिए प्यार थी या बस एक दोस्त या फिर एक टाइमपास थी ? ये तो चंदू ही जानता है। रेणुका का रोज फोन आना उससे बात होना चंदू के दिल को बहुत अच्छा लगता था। दिन भर वो कॉलेज में रहती थी चंदू भी कॉलेज में रहता था तो इस कारण से दोनों की बात नहीं हो पाती थी। जैसे ही चंदू अपने कॉलेज से निकलता था तो वह अपना फोन देखता था कि किसी का फोन तो नहीं आया। रेणुका का कॉलेज से निकलने का समय फिक्स रहता था लेकिन चंदू का नहीं इस बजह से ये जरूरी नहीं होता था कि रेणुका अपने फिक्स समय पर फोन लगाए औऱ चंदू उठा ही ले। रेणुका अपने रूम जाकर अपना काम करके वो चंदू को फोन करती थी लेकिन यदि चंदू कॉलेज में रहता था तो नहीं उठा पाता था इस बजह से उसकी बात कभी कभार उसके द्वारा फोन लगाने पर नहीं हो पाती थी।
जैसे चंदू अपने फोन को देखता था तो कई मिस्डकॉल डली रहती रहतीं थी तो वह सोचता था कि पहले किसको लगाएं ? तो मन यही जवाब देता था कि रेणुका तो अपनी है उसको कभी भी लगा लेंगे पहले अन्य लोगों से बात कर लो तो इस प्रकार से रेणुका के पहले जिनकी मिस्डकॉल रहती थीं उनको फोन लगाता था, तभी इस बीच कभी-कभी रेणुका का फोन आ जाता था। अब रेणुका का फोन चंदू को उस बीच मजबूरन उठाना पड़ता था क्योंकि वह सोचता था कि रेणुका कहीं गलत ना समझे कि मेरा फोन क्यों नहीं उठा रहे हैं तो चंदू बोल देता था कि रेणुका रुको थोड़ा, हम तुम्हे फोन लगाते हैं। तो रेणुका का जबाब आता था कि मुझे पढ़ने बैठना है फिर बात नहीं हो पाएगी, तो चंदू कहता है हां चलो ठीक है पढ़ लो बाद में बात करेंगे। इस तरह से फोन कट जाता है लेकिन रेणुका मन ही मन में निराश हो जाती है।
चंदू भी अपने काम पूरा कर लेता है और मोबाइल चलाने लगता है तो इस बीच रेणुका का फोन आ जाता। चंदू फोन उठाकर बोलता है कि अरे मेरी जान... मैं तुम्हे फोन लगाने ही वाला था। दोनों की बात होती रहती है लेकिन थोड़े समय बाद चंदू को नींद आने लगती है। समय भी ज्यादा नहीं हुआ होगा 10 ही बज रहे होंगे तो इस तरह वो सोने की बोलकर फोन काट देता है। लेकिन ये बात रेणुका को अच्छी नहीं लगती है लेकिन वो सोचने लगती है कि ना दिन में बात करते हैं औऱ ना ही रात में बात हो पाती है। लेकिन वह अपने मन को समझा कर अपने काम करने लगती है और फिर सो जाती है।
चंदू की छुट्टिया हो जाती हैं तो वह अपने गांव आ जाता है लेकिन रेणुका का कॉलेज चालू रहता है तो अब भी वही स्थिति बनी हुई थी बात करने की। एक बार चंदू अपने साथियों के साथ बैठा हुआ था तभी उसका फोन आया तो उसने उठाकर थोड़ी सी बात की और रुककर फोन लगाते हैं यह बोल कर फोन काट दिया। चंदू अपने गांव में था इसलिए उसके मिजाज अलग ही थे, शहर से कोई गांव लौटता है तो गांव वाले अलग ही इज्ज़त देते हैं इसका गवाह गार मैं स्वयं हूं। चंदू की गलती ये हो जाती है कि वैसे भी कई दिनों से रेणुका चंदू को नोटिस कर रही थी। लेकिन चंदू इस भूल में था कि वह तो मेरी है वो नाराज कैसे होगी तो उस दिन उसने फोन नहीं लगाया। अपने घर गया रात का भोजन किया तब उसको रात करीब 11 बजे याद आया कि अरे... रेणुका को फोन लगाना था। वह फोन लगाने ही वाला था तो तभी उसके पापा जी ने कुछ काम बता दिया इससे उसका ध्यान फिर बट गया इस वजह से उस दिन उसकी बात ही नहीं हुई।
रेणुका तो नाराज ही हो गई थी इस बात को लेकर उसने अपने एक दोस्त को बताया लेकिन रेणुका ने कभी चंदू को नहीं बताया कि मुझे आपकी ये आदत अच्छी नहीं लगती है। उस दोस्त ने भी चंदू को नहीं बताया शायद वो अपनी आदत में सुधार लाता, दो दिन तक दोनों की बात नहीं हुई। चंदू ने फोन लगाया तो रेणुका जरूरी काम कर रही होगी इस वजह से उसने एक ही मिनिट बात की और बाद में लगाने का बोलकर फोन रख दिया। लेकिन बाद में उसका फोन नहीं आया और चंदू सो गया इस बीच उसने कॉल किया लेकिन चंदू तो सो गया था फोन नहीं उठाया तो फिर से बीच में नींद आ गई। सुबह चंदू फोन लगाता लेकिन वो तो कॉलेज में होगी ये सोचकर उसने नहीं लगाया।
एक दिन चंदू कहीं से यात्रा करके लौटा था तो बहुत थक गया था अपने रूम में आराम कर रहा था, उस दिन उसके रूम में उसके चाचा भी सो रहे थे। इसी बीच रेणुका का फोन आया तो पहले तो बात करता रहा लेकिन वह सोच रहा था कि उसकी बातें उसके चाचा ना सुन लें इस वजह से चंदू ने रेणुका से कहा कि हम सुबह बात करेंगे। लेकिन रेणुका उस दिन हट कर रही थी उसी बक्त बात करने की बोल रही थी। चंदू बाहर निकलना चाहता था अपने रूम से लेकिन उसे डर भी लग रहा था कि चाचा जी जग ना जाएं तो उसने फिर सुबह का बोल कर फोन काट दिया। लेकिन उसका फिर फोन आ गया और तब वो सुनाने लगी कि जब देखो जब नींद ही आती रहती है। लेकिन चंदू को नींद हक़ीक़त में आ रही थी तो वह बात करते-करते सो गया। इस प्रकार से फिर फोन कट गया अब फोन कटने के बाद रेणुका के दिल में कई प्रकार के सवाल उठते होंगे कि चंदू हमसे प्यार करता है या नहीं उनको नींद ही आती रहती है, जब भी बात होती है तो नींद का बहाना ले लेते हैं।
चंदू अब उस दिन से जल्दी बात कर लिया करता था, रेणुका अपने घर आ रही थी, इस बीच उन दोनों की बात हुई तब भी कम ही बात हुई। रेणुका अपने घर आ गई लेकिन उस दिन से उसका ना कोई फोन आना, ना मैसेज आना सब बंद हो गया था। कुछ दिन तो चंदू ने सोचा कि शायद घर पर है तो नहीं कर रही होगी लेकिन ऐसा हुआ ही नहीं था बात तो कुछ और ही थी। कुछ दिनों बाद चंदू ने फोन लगाया जानते हुए कि घर पर है तो फोन बंद जा रहा था। अब वह घबराने लगा क्योंकि वह ये भी जानता था कि रेणुका का यदि फोन बंद होता है तो वह किसी ओर के फोन से भी लगा सकती थी लेकिन उसने नहीं लगाया। अब दोनों की बात ही नहीं हुई तो चंदू ने उसकी एक दोस्त को फोन लगाया तब उसने बताया कि तुम दोनों के मैसेज उनके घर वालों ने पढ़ लिए हैं और अब फोन मत लगाना, इतना कहकर फोन कट गया था। यह सुनकर चंदू के दिल में मानो एक अंधेरा सा हो गया लेकिन उसको फोन मत लगाने की बात का उसको कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि यह बात उसकी दोस्त ने कही थी ना कि रेणुका ने। एक दिन अचानक रेणुका का मैसेज आया कि #सॉरी... अब हमारी बात नहीं हो सकती है। तो चंदू की मानो नींद ही उड़ गई हो उसने कई बार कहा कि सिर्फ एक बार फोन पर बात कर लो आखिर हुआ क्या है ये तो बता दो। लेकिन रेणुका बात करने को किसी भी प्रकार से राजी नहीं हुई क्योंकि वह चंदू से मोहब्बत करती थी इसलिए उसको डर था कि हमारे रिश्ते पहले जैसे ना हो जाएं इसलिए बात ही नहीं की। सवाल ये भी उठता था कि रेणुका जब प्यार करती है तो एक बार भी फोन पर बात करने या मिलने से इंकार क्यों कर रही है? ये सवाल चंदू जानना चाहता था लेकिन जबाव कहीं से नहीं मिला आगे भी तलाश में था कि कभी तो रेणुका बताएगी।
रेणुका का एक बार फिर मैसेज आया कि अब बिजी लोगों से कैसे बात करूं आप बहुत बिजी रहते हो। हालांकि ये उसका गुस्सा था पूर्व के दिनों का ये सच नहीं था। सच तो वह था जो उसके साथ उसके घर वालों ने किया होगा जो चंदू जानना चाहता था लेकिन उसे किसी ने नहीं बताया और आज भी सच नहीं जानता और ना रेणुका ने कभी बताया। कई बार चंदू ने मनाने की कोशिश की लेकिन एक बात भी रेणुका ने नहीं मानी, चंदू रोता रहा, बिलखता रहा, अपने प्यार की भीख रेणुका से मांगता रहा लेकिन उसकी एक न सुनी। वह इस भी परेशान था कि रेणुका उसके साथ शादी करना चाहती थी तब भी वह मोहब्बत के रिश्तों में आने के लिए तैयार नहीं हो रही थी। चंदू सोच रहा था कि आखिर ऐसी कौनसी बात हुई होगी घर पर जो रेणुका अपने जीवन की खुशियों की बलि दे रही है। कुछ तो बड़ा उस दिन उसके घर पर हुआ था जो रेणुका अपने कसमें वादे सभी भूल गई थी लेकिन बात करने को तैयार नहीं थी इस प्रकार से उसी दिन से उनका रिश्ता टूट गया। जैसा कि पहले ही लिखा था कि रेणुका चंदू के लिए क्या थी उसका अंदाज तो इस बात से लगाया जा सकता है कि उसी दिन से आज तक चंदू को अब समय से नींद नहीं आती है क्योंकि उसके जाने के बाद नींद भी चली गई।
लेखक - चन्द्रभान_सिंह_लोधी
( नोट- यह कहानी सच्ची घटना पर आधारित है लेकीन इसमें नाम काल्पनिक हैं)
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