चुनाव जीतने के लिए किस हद तक गिर सकते हो नेताजी ??
कई दिनों से मैं सोच रहा था कि वर्तमान की बयानबाजी पर कुछ लिखूं, फिर सोचने लगा यदि सच लिखूंगा तो कहीं मैं खुद देशद्रोही घोषित ना कर दिया जाऊं और अच्छी खासी जॉब कर रहा हूं तो उससे भी हाथ ना धो बैठूं. लेकिन आज मन ने कह ही दिया कि सच लिखने पर जो कुर्बानी लग जाए तो सीधे दे ही देनी चाहिए लेकिन कभी शांत मत बैठना चाहिए.
आज हम बात करते हैं दिल्ली चुनाव की तो वहाँ के वर्तमान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हैं, हालांकि मुझे तो नहीं पता कि वहां कितना विकास हुआ क्योंकि मैं अभी तक दिल्ली गया ही नहीं लेकिन हां हमारे देश की मीडिया के दिखाएं और बताए अनुसार यह जरूर कह सकता हूँ कि शायद अच्छा काम किया होगा तभी तो अन्य पार्टी काम पर बात नही करती. सभी को मालूम है कि चुनाव जीतने के बाद दो-तीन साल तो वहां के माननीय उप राज्यपाल महोदय जी ने विकास नहीं करने दिया हर फाइल में अपनी टांग अड़ा देते थे. खैर वो बात अलग है मैं थोड़ी आम आदमी पार्टी का स्पोक पर्सन हूँ.
हम बात करते हैं बयानबाजी के ऊपर अभी हमारे देश की सरकार और संसद से cab पास हुआ और caa बना अब इसको लेकर बहुत विरोध चल रहा है. शाहीन बाग में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, प्रदर्शन इस हद तक बढ़ गया कि सरकार बैकफुट पर आ गई. भले ही वह वापस ना ले उनकी बात ना माने लेकिन इतना जरूर है कि सोई हुई सरकार की सिंहासन जरूर हिल गई.
हमारे देश के प्रधानमंत्री बयान देते हैं कि हम देश से अर्बन नक्सलों को कपड़ों से पहचान सकते हैं, तो jnu में गुंडों द्वारा हमला हुआ, छात्रों पर हमला हुआ यह लेफ्ट वालों ने किया या राइट वालों ने किया कोई पता नहीं तो फिर मोदी जी के पास कपड़े क्यो नही भेजे गए. कांग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर लाहौर से आते हैं और शाहीन बाग जाते हैं, बड़े जोश से जाते हैं और भाषण देते हैं और कहते हैं कि हम कातिल को देख लेंगे ये सभी को पता है कि किसको कहा लेकिन ये बेहद गलत कहा.दिल्ली में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, बीजेपी की टिकट घोषित हुई किसी को यकीन नहीं था कि जो व्यक्ति हमारे देश के प्रधानमंत्री को बहुत गंदी बात बोलेगा उसे भाजपा टिकिट दे सकती है. लेकिन वही कपिल मिश्रा बोलते हैं कि 8 तारीख को इंडिया और पाकिस्तान के बीच मुकाबला है, दिल्ली औऱ पाक के बीच मुकाबला है. मेरा सवाल ये है कि क्या जो बीजेपी के विरोध में हो या उसको बोट न दे तो बो पाकिस्तानी हो जाता है. अपने ही शहर और राजधानी को पाकिस्तान बोल दिया जाता है तो ये है आपकी देशभक्ति, राष्ट्रवादी? फिर भी चुनाव आयोग खामोश रहता है महज छोटी सी कार्रवाई कर देता है, सिर्फ दिखावे के लिए कि हम निष्पक्ष हैं.
उसी पार्टी के नेता उनका मैं बहुत आदर करता था युवा नेता है केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर खुले मंच से बोलते हैं और मासूम जनता को भड़काते हैं कि देश के गद्दारों को गोली मारो सालों को क्या ये आचार संहिता में इस तरह की अमर्यादित भाषा स्वीकार है? क्या ये लोकतंत्र की भाषा है? यदि हमारे देश में गद्दार हैं तो उनको सरकार जेल में क्यों नहीं डालती? अभी तक क्या कर रही है? सबसे बड़ी हैरानी की बात तो यह हो जाती है कि जनता की तरफ से आवाज आती है जब पूछते है कि गद्दार कौन तो कहते हैं केजरीवाल और राहुल गांधी यदि बो गद्दार है तो सांसद और cm कैसे हैं अभी तक? मेरी समझ से बाहर है.
दिल्ली के सांसद प्रवेश वर्मा बयान देते हैं कि हमारी सरकार बनी तो 1 घंटे के अंदर शाहिनबाग नहीं दिखेगा और 1 महीने के अंदर सरकारी जमीनों पर बनी मस्जिदों को मिटा दिया जाएगा, अरे बाबा दिल्ली पुलिस किसके हाथ में है अभी तक शाहीन बाग क्यों नहीं हटाया? यह बयान धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाता? क्या इस बयान से दंगा का माहौल नहीं फैल सकता फिर भी निष्पक्ष चुनाव आयोग शांत रहता है . चुनाव आयोग ने नोटिस दिया कि स्टार प्रचारकों की लिस्ट से इनके नाम से हटाए जाए. जो खुलेआम गोली मारने की बात करता हो एक संवैधानिक पद पर रहते हुए संविधान की शपथ लेता हो जो कि मैं किसी के साथ भेदभाव नहीं करूंगा वह व्यक्ति सरेआम हजारों की जनसंख्या में गोली मारो गद्दारों को बोलता हो यह अशोभनीय और लोकतांत्रिक के लिए बहुत ही गंदी भाषा है.
बीजेपी के नेता, महासचिव कैलाश विजयवर्गीय पोहा से पहचान जाते हैं कि कौन बांग्लादेश का है, कौन पाकिस्तान का है, कौन हिंदुस्तान का है. तो मेरे मन में सवाल उठा कि यदि आप पोहा खाने से पहचान जाते हो तो फिर क्यों लाए caa पोहे कैंप खुलवा देते. बस मेरा सवाल इतना कि राजनीति का स्तर इस तरह से गिर गया कि जो युवा आना चाहते थे वह आज राजनीति को गंदी निगाहों से देखते हैं. चुनाव जीतने के लिए महज कुर्सी पाने के लिए इतनी गंदी भाषा बोली जाती हो तो फिर हम कैसे देश को आगे बढ़ा सकते हैं.
जूनियर ओवैसी बयान देते हैं कि हमारे पूर्वजों ने हिंदुस्तान पर 800 साल राज किया, हम देख लेंगे तो क्या ये भड़काऊ बयान नहीं है? आप क्या देखोगे और किसे देखोगे? ये दुनिया जानती है कि मुगलों ने हमारी संस्कृति धर्म हर किसी पर चोट पहुंचाई थी यदि आप अपने आप को मुगलो की औलाद बताते हो तो फिर पूरे देश के मुस्लिम भाईयो पर उंगली उठवाना चाहते हो क्योंकि मुस्लिम और मुगलों में बहुत बड़ा अंतर है. देश की आजादी में जितना खून हिन्दुओ का बहा है तो उतना मुस्लिमो का भी.यदि इस तरह से भड़काऊ भाषण या बयान दिए जायँगे तो फिर हमारा देश कैसे आगे जा सकता है.
चुनाव लड़ो जीतो लेकिन बो भाषा तो मत बोलो जिससे किसी के धर्म, जाति, व्यक्तिगत भावनाओ को ठेस पहुंचे आप मस्जिद यदि गिरा दोगे तो क्या आप मन्दिर को तोड़ने के बराबर बात नही कर रहे? किस हिन्दू धर्म मे लिखा है कि किसी का घर मिटाने में वीरता है या पुण्य का काम है? चाहे किसी भी पार्टी के नेता हो अपने शब्दों को कंट्रोल रखना चाहिए बाकी आप सभी को दिल्ली चुनाव मुबारक हो.
- चन्द्रभान_सिंह_लोधी

Bahut Sundar.
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